Abhishek Maurya

Abhishek Maurya

Monday, March 12, 2012

तू बढ़ चले,,तू बढ़ चले,, मंजिल में तू अकेला है,, II

गर्दिशों के सारे सितारें तेरी झोली में गिर जायेंगे,,,
तू हाथ एक बार आसमान पे फैला के तो देख,,
ये चाँद ये सितारें,,ये सूरज भी तेरी एक मुठी में समा जायेंगे,,
बस तू एक बार अपना हौसला बड़ा के तो देख,...

तू बढ़ चले,,तू बढ़ चले,,
मंजिल में तू अकेला है..


जिस राह पे तुझको चलना है,
,उस राह पे तू ध्यान से चल,,
उसको अपने हिसाब से चला,,
वो भी तुझको तेरे लक्ष्य तक ही पहुचायेगी,
तू भरोषा अपने ऊपर ही रख,,
तू विचलना कभी नहीं,,
तू बढ़ चले,,तू बढ़ चले,,
मंजिल में तू अकेला है,,
मंजिल में तू अकेला है..

तू समंदर के गहराई से डरना कभी नहीं,,
वो भी एक इंसान के तुच्छ सी एक देन है..
ढाई पग में तेरे सामने पूरा ब्रह्माण्ड है,,
वो नापने वाला भी एक इंसान था,,
तू बस विफल होना नहीं,,

तू बढ़ चले,,तू बढ़ चले,,
मंजिल में तू अकेला है,,
मंजिल में तू अकेला है..

कहते है आसमान और समंदर कभी मिलते नहीं,,
वो सब एक सामान है,,ये कोई देखता नहीं,,
गहराई में नापों,,अस्सेमता में नापों,,,
इनका कोई मेलजोल नहीं,,
लक्ष्य भी तेरा ही एक प्रतिरूप है,,
तू हाथ एक बार फैला के तो देख,,,
सब तुझको ही छुने को मजबूर है,,
सब तेरे लिए ही है,,

तू बढ़ चले,,तू बढ़ चले,,
मंजिल में तू अकेला है,,
मंजिल में तू अकेला है..

रेत के सायें को तू जरा समझ के देख,,
एक-एक जर्रा तुझसे कुछ कहने को है सुन,,
वो है तुझको अपनी बाहों में लेने को धुन,,
तू एक बार,,मुड के तो देख,,
रास्ता खुद बा खुद ही कट जायेगा,,
तू बस अपनी नज़र को जरा,,
मंजिल पे रख के तो देख,,,
सब कुछ तेरा ही हो जाएगा,,

तू बढ़ चले,,तू बढ़ चले,,
मंजिल में तू अकेला है,,
मंजिल में तू अकेला है..







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