हूँ मैं शांत तो इसका ये मतलब नहीं की मैं कुछ कहना नहीं चाहता,,
हूँ मैं अजनबी तेरे लिए, तो इसका मतलब ये नहीं की मैं तुझसे कुछ कहना नहीं चाहता,,
होके जुदा तू है अब भी मेरे पास कहीं,,रहती है अभी भी हर जगह हर जुस्तुजू में कहीं,,
तो कैसे कह दूँ,, कि तू मेरे जिस्म का एक हिस्सा कभी भी कैसे भी न थी कहीं....
तेरे से कई गिले शिकवे होते रहे ,, हम बड़े प्यार से उनको सुलझाते रहे,,
तो अब क्या दुरिया बनाई है तुने,, कि जिक्र उठता है तो अल्फाज कम हो जाते हैं,,
हम एक दुसरे से इतने दूर क्यों हो जाते हैं,,
वो प्यार कहाँ गया हमारे बिच का,, जिस से किसी को जानबुच के हम कभी कभी जलाया करते थे,,
हसते रहते थे रात भर ,,बाहों में एक दुसरे की ,,एक झलक आँखों का बयां करते थे हम कहीं,,
फिर कहाँ गए वो दिन हमारे साथ के बिताएं पलों के,,
वो रातें वो बातें,,वो हसती कि सुनी राहों के,,
अब नहीं सहा जाता,, हो गया तेरे नाराज होना,,
अब तो बहुत दिन हो दिन हो गए,,लौट के आ जाओ,,
अब तेरे बिन अकेले जिया नहीं जाता,,,
याद है तुझे ,, तू एक बार रोई थी मेरे लिए,,
पागल था तब नहीं समझता था तुम्हे ,,कि तुम कितना ख्याल रखती हो मेरा,,
जबरदस्ती काम करवाती थी,,डॉक्टर से लेकर दवाई तक ,,सब याद भी दिलाती थी,,
आज इतना सब कुछ हो गया,,अकेला हुईं मैं यहाँ पे,,
सुनी राहों में अब कोई लफ्ज सुनाई नहीं देता है,,
अब तो तेरे बिन मेरा मन कहीं भी कभी भी नहीं लगता है,,...
आज मुझे तेरे ख्याल का एहसास आया,,
वो लड़ाइयाँ ,, वो गिले शिकवे में तेरा मनाना याद आयन,,
तो अब क्या हो गया ,,उन रिश्तों में तेरे मेरे बिच में जो होते थे कभी,,
कोई नहीं सायद तुम वो सब कुछ भूल चुकी हो,,
इतने अजनबी हो चुकी हो,,कैसे याद रखोगी वो बीते रिश्तों के नजाकत को,,
सुना है तेरी उस दुनिया में भगवन नाम का भी कोई शक्श होता है,,
सुना है वो चाहने वालों को जल्दी बुला लेता है,,
तुझे इतना क्यों चाह उसने इसकी भी लड़ाई करनी है उस से,,
अगर हारने से उसको डर लगे,, तो कह देना,,
मुझे भी छह ले,, अपने पास बुला ले,,
मगर न जुदा होने दे तुझे मेरे से कहीं ,,
कैसे रहता हुईं मैं यहाँ अकेले,,कैसे बयां करूँ,,
अल्फाजों कि कमी से किसी से कुछ कह नहीं पता,,
तुझसे कितना प्यार किया,,और कितना करता हूँ,,
बस ये तुझसे आज तक कह नहीं पाया,,,
अब लौट के आ जाओं,,तो बता दूंगा सब कुछ अपने दिल के अरमान,,
कि इस बार जाने नहीं दूंगा तुझको अपने से दूर किसी और के पास....
कि इस बार जाने नहीं दूंगा तुझको अपने से दूर किसी और के पास....